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Poem on Guru Purnima

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Posted by on July 19, 2016 in My Poems

 

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मेरा देश बदल रहा है – मेरा सैंया बदल रहा है :)

 

ભાવતા ભોજનનો પણ જયારે અતિરેક થઇ જાય ત્યારે પેટમાં આફરો ચઢી જાય. આજકાલ ‘મેરા દેશ બદલ રહા હૈ’ નો આફરો તો  કાનમાં ચઢી ગયો છે, અવળો ગેસ ચઢેને એમ 🙂

છેલ્લા અઠવાડિયાથી રેડીઓ સ્ટેશનોએ ‘મેરા દેશ બદલ રહા હૈ’ વગાડીને મગજ કાણું કર્યું’તુ અને એમાં એક કપલના કાઉન્સેલીંગ દરમ્યાન પતિનો મોબાઈલ રણક્યો. હવે એની રીંગ ટોન પણ ‘મેરા દેશ બદલ રહા હૈ’!!

પછી તો, એમની જ સમસ્યા ઉપરથી રાત્રે પેરોડી ગીત લખાઈ ગયું।
લ્યો તમે’ય મમળાવો ત્યારે, કદાચ આફરો ઉતરી જાય…

देखो घर से खिल कर रोज़ निकल रहा है

ख़यालों में किसी के अब ऊंचा उड़ रहा है

मेरा सैंया बदल रहा है, कहीं और लटक रहा है

चहेरे पर मुँहासा रोशन सा हो रहा है

वोर्डरोब से रोज कुछ नया निकल रहा है

शरीर के हर कोने में डीओ उड़ रहा है

घंटा शीशे के सामने बिताए जा रहा है

मेरा सैंया बदल रहा है, कहीं और लटक रहा है

छुप छुप कर चेटिंग उभर रहा है

दूसरा सीम भी पोकेट में पल रहा है

दबी आवाज़ से मोबाइल हो रहा है

कोल हिस्ट्री डीलीट किए जा रहा है

मेरा सैंया बदल रहा है, कहीं और लटक रहा है

सेल्फ़ी, फ़ोटो सब अपलोड हो रहा है

स्टेटस, प्रोफ़ाइल पीक बदला जा रहा है

नेटवर्क नहीं मिलने पर गभरा सा रहा है

और हर जगह वाइफ़ाइ ढूँढे जा रहा है

मेरा सैंया बदल रहा है, कहीं और लटक रहा है

लोंग ड्राइव अब मन को भा रहा है

कोफ़ी शोप भी रोज बुला रहा है

बिना वजह घर से बाहर जा रहा है

बहाने जूठे कुछ यूँही बनाए जा रहा है

मेरा सैंया बदल रहा है, कहीं और लटक रहा है

Parody Song

 

 

 

 

 
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Posted by on June 3, 2016 in My Poems

 

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વર્ષા મુબારક…

વર્ષા મુબારક...

વર્ષા મુબારક…

 
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Posted by on July 4, 2013 in Uncategorized

 

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Find out how young you are at heart… :P

If you have listened Bollywood item numbers of recent time then you will enjoy this post……

In fact, this post will tell you how young you are at heart… 😛
If you can spot all the songs of this poem, you are very young at heart 🙂 🙂 🙂
Tell me how many are there ?!!

मर्द बेचारा क्या करे?!

रास्ते मे खड़ी बिजली की वजह से धीरे चले,

या फिर बेबो का दिल लेने दोड़ पड़े ?!

गुंडों में फंसी रज़िया को बचाए,

या फिर अगबाई के हल्ले से बचे ?!

अपने लिए बदनाम मुन्नी के बारे में सोचे,

या फिर डिस्को चली अनारकली के पीछे जाए ?!

फ्लोर पर पार्टीगर्ल राधा के साथ नाचे,

या फिर सब की लेला का मज़ा ले ?!

छोरो की नियत ख़राब करनेवाली हलकट जवानी को देखे,

या फिर हाथ न आनेवाली शिला की जवानी को चाहे ?!

पौआ चढ़ा के आई चिकनी चमेली से खेले,

या फिर कितनो के दम निकालने वाली जलेबीबाई से ?!

मर्द बेचारा बड़ा कन्फ्यूज, करे भी तो क्या करे?!

शरीफ बनना चाहें लाख मगर; अब लो आ गई बबली,

‘न बन शरीफ तू, बबली बदमाश है’!!

और हो गया मर्द बदमाश तो लैला लिख के ले गई!!

मर्द बेचारा करे भी तो क्या करे, दिल की तो लग गई 😛 😛 😛

डॉ.हंसल भचेच

 
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Posted by on April 16, 2013 in Uncategorized

 

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